रतन टाटा एअर इंडिया को खरीदेंगे या फिर दूसरी कंपनियों पर ही भरोसा करेंगे

मुंबई– रतन टाटा उड़ान भरने के मामले में कोई अजनबी नहीं हैं। उम्र के 80 पार कर चुके टाटा मशहूर बिजनेस लीजेंड जब 17 वर्ष के थे, तभी एक बार ऐसे विमान को उतारा, जिसने अपना एकमात्र मिड-फ्लाइट इंजन खो दिया था। उन्होंने सुपरसोनिक F-16 फाइटर जेट का भी संचालन किया है। पर अब वे दोराहे पर खड़े हैं। या तो सरकारी विमानन कंपनी एअर इंडिया को खरीद लें या फिर वे दूसरी कंपनियों पर ही भरोसा करें।   

हालाँकि, एविएशन को लेकर टाटा का प्यार, व्यावसायिक सफलता में कन्वर्ट नहीं हो सका है। टाटा समूह की दो एयरलाइंस- एयर एशिया इंडिया और विस्तारा – कोरोनोवायरस महामारी से पहले ही संघर्ष कर रही थीं। अब कोविड -19 ने टाटा संस लिमिटेड को चौराहे पर खड़ा कर दिया है।  प्रत्येक में इसकी 51% हिस्सेदारी है। अब इसे या तो सरकारी एअर इंडिया लिमिटेड को खरीदना है या फिर रेड जोन में चले जाना है। 

मुकुंद राजन, जो कि टाटा ग्रुप की कार्यकारी परिषद के एक पूर्व सदस्य रह चुके हैं और फिलहाल एक निवेश सलाहकार फर्म के अध्यक्ष हैं। वे कहते हैं कि टाटा एक बड़ी ही दुविधाजनक स्थिति में है। “एक सफल एयरलाइन चलाने के लिए एकमात्र विकल्प है कि कुछ बड़ा किया जाए। इसके लिए टाटा को अधिक पूंजी की आवश्यकता होगी, जो उन्होंने अब तक किया है। भारत सरकार वर्षों से घाटे में चल रही राष्ट्रीय एयरलाइन को बेचने का असफल प्रयास कर रही है। टाटा समूह का विमानन में कम एक्सपोजर है। इसके बारे में कहा जाता है कि एअर इंडिया को खरीदने वाला यह एक बड़ा और संभावित दावेदार है। नरेंद्र मोदी प्रशासन ने खरीदारों को लुभाने के लिए कई कदम उठाए हैं, पर टाटा समूह ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। 

टाटा को एयरलाइन खरीदने के बारे में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। वॉरेन बफेट ने इस साल की शुरुआत में सभी एयरलाइन शेयरों में से बाहर निकलते हुए कहा कि महामारी ने व्यवसाय को बिल्कुल बदल दिया है। रिचर्ड ब्रैनसन एक बार कह चुके हैं कि यदि आप एक करोड़पति बनना चाहते हैं, तो एक अरब डॉलर से शुरू करें और एक नई एयरलाइन लॉन्च कर दें।

लेकिन जैसा कि टाटा ग्रुप अलग काम करता है, वह किसी भी कीमत पर एयरलाइन का काम आगे बढ़ाने की दिशा में सोच रहा है। विस्तारा और एयर एशिया इंडिया ने कभी पैसा नहीं कमाया है। CAPA के अनुमानों के अनुसार, इस साल मार्च से संयुक्त रूप से दोनों को लगभग 845 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। टाटा के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके साइरस मिस्त्री इसके बारे में चेता चुके हैं। उन्होंने अक्टूबर 2016 के एक पत्र में कहा था कि एयरएशिया ग्रुप के साथ साझेदारी निरर्थक थी। मिस्त्री, सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड के साथ विस्तारा के कामकाज से खुश नहीं थे। 

टाटा समूह के लिए, यह एक समृद्ध विरासत पर पकड़ का भी सवाल है। रतन टाटा के पूर्ववर्ती, महान उद्योगपति और परोपकारी जेआरडी टाटा, भारत के पहले लाइसेंस प्राप्त पायलट थे। उन्होंने 1932 में टाटा एयरलाइंस को राष्ट्र के पहले वाहक के रूप में शुरू किया, जो तब अविभाजित, ब्रिटिश शासित भारत और बॉम्बे में कराची के बीच उड़ान भरता था। टाटा एयरलाइंस को बाद में भारत की स्वतंत्रता के समय के आसपास एयर इंडिया में राष्ट्रीयकृत और जोड़ दिया गया।

जब भारत ने 1990 के दशक की शुरुआत में निजी एयरलाइंस को अनुमति देना शुरू किया, तो टाटा की दिलचस्पी फिर से बढ़ गई। 1994 में, टाटा समूह सिंगापुर एयरलाइंस की साझेदारी में 100 विमानों के साथ एक एयरलाइन शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना के साथ आया था, लेकिन सरकार ने विदेशी प्रवेश की अनुमति देने से इनकार कर दिया और योजना को रद्द कर दिया गया।  

साल 2000 में, टाटा ने फिर से सिंगापुर एयर के साथ मिलकर एयर इंडिया में हिस्सेदारी के लिए बोली लगाई। पर राजनीतिक विरोध के कारण योजना को बाद में छोड़ दिया गया था। प्रॉक्सी सलाहकार कंपनी इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक श्रीराम सुब्रमण्यम ने कहा कि एयरलाइंस बहुत प्रतिस्पर्धी और पूंजी वाला बिजनेस है। इनमें से एक को चलाना मुश्किल है। टाटा समूह ने दो अलग-अलग भागीदारों के साथ दो एयरलाइन कंपनियों में निवेश किया, पर अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि समूह क्या हासिल करने की कोशिश कर रहा था। 

एयरएशिया इंडिया और विस्तारा दोनों के अलग-अलग मुद्दे हैं। 2014 में शुरू की गई एयरएशिया इंडिया ने चार महीनों के भीतर पैसा बनाने का संकल्प लिया और यात्रियों को सस्ती कीमतों के साथ लुभाने की योजना बनाई। लेकिन इसे बाजार में गलाकाट प्रतियोगिता का सामना करना पड़ा जहाँ हवाई किराए कुछ सेंट के बराबर होते हैं। विस्तारा 2015 में शुरू हुई। इसके सभी विमानों में बिजनेस क्लास केबिन के साथ अमीर भारतीय व्यापारियों को लंदन और न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भरने की पेशकश की गई। इसका एक ही लक्ष्य था कि पैसेंजर को व्यक्तिगत उड़ान अनुभव हासिल हो। हालांकि मीटिंग विडियो से होने लगी और कोरोना महामारी ने तो इसे जरूरी बनाकर सारा काम ही बिगाड़ दिया। 

टाटा समूह के विमानन व्यवसाय के अंदरूनी कामकाज से परिचित लोगों के अनुसार, दोनों एयरलाइनों को विदेशी भागीदार बहुत कम मिलने लगे जो अब इसके लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। विस्तारा और एयरएशिया इंडिया के टॉप मैनेजमेंट को या तो सिंगापुर या मलेशिया में बिठाया गया था जिसने भारत में व्यवसाय को पैर जमाने में मुश्किलें पैदा की।इस एयरलाइंस में दूसरी पंक्ति के एग्जीक्यूटिव भी अपने कार्यकाल के दौरान फाइव स्टार होटलों में ठरहते हैं और अपने बच्चों को सबसे महंगे स्कूलों में भेजते हैं, जबकि भारतीय समूह द्वारा नियुक्त लोगों को ऐसा ठाट-बाट का लाभ नहीं मिला।

एयरएशिया इंडिया में, स्थानीय अधिकारियों को 2018 के अंत तक हर फैसले के लिए मलेशिया की मंजूरी लेनी थी। भारत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), जिसे एफबीआई के बराबर माना जाता है, फर्नांडिस और अन्य अधिकारियों द्वारा स्थानीय नीति को प्रभावित करने के लिए रिश्वत देने के मामले की जांच कर रही है। एयरएशिया ग्रुप और एयरएशिया इंडिया दोनों ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। 

टाटा समूह में किसी विमानन प्रभारी व्यक्ति की कमी भी एक चुनौती थी। मार्केट लीडर इंडिगो का बिजनेस मॉडल, जिसने समय-समय पर उड़ानों के लिए सस्ते टिकट बेचने के बाद साल दर साल पैसा कमाया है, का गंभीरता से अध्ययन नहीं किया गया है। रतन टाटा 2016 में ही अंतरिम चेयरमैन के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। एयरलाइंस ही एकमात्र ऐसा सेक्टर नहीं है, जिसमें 152 साल पुराने बिजनेस घराने ने संघर्ष किया है।

2007 में कोरस ग्रुप पीएलसी को लगभग 13 बिलियन डॉलर में खरीदने वाली टाटा स्टील लिमिटेड ने हाल ही में कहा कि वह यूके व्यवसाय को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपने विकल्पों की समीक्षा कर रही है। टाटा मोटर्स लिमिटेड 2008 में 2.3 बिलियन डॉलर में जगुआर लैंड रोवर खरीदा था। उसमें भी तेज प्रतिस्पर्धा के बीच नुकसान का सामना किया है। जापानी टेलीकॉम कंपनी NTT डोकोमो इंक के साथ 1.2 बिलियन डॉलर के विवाद में टाटा कंपनी का टेलीकॉम कारोबार भी छिन्न-भिन्न हो गया, जो 2017 में सुलझ गया था।

बिजनेस कंसल्टेंसी ट्रेंडवॉच इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक दीपक मोहोनी ने कहा कि अगर आप सभी टाटा कंपनियों को लेते हैं, तो उनका लाभप्रदता का रिकॉर्ड बिल्कुल शानदार नहीं रहा है। केवल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ही उनके लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन रहा है। हमें वास्तव में पूछना होगा कि टाटा एयरलाइंस में जाने की इतनी कोशिश क्यों कर रहे हैं? क्या यह JRD नॉस्टैल्जिया है?

नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बिजनेस स्कूल की एसोसिएट डीन वानी जोशी लोहानी के अनुसार, टाटा अभी भी विमानन में सफल हो सकते हैं। लोहानी एयरलाइंस में टाटा के फ़ॉरेस्ट का अध्ययन कर रही हैं। उनका कहना है कि टाटा को एक मूल्य-संवेदनशील बाजार (price-sensitive market) में कम-लागत वाली एयरलाइन बनने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। टाटा सन्स एक गैर-प्रतिस्पर्धा क्लॉज को हटाने के लिए सिंगापुर एयरलाइंस के साथ बातचीत कर रहा है ताकि विस्तारा एयर इंडिया के लिए बोली लगा सके। टाटा समूह के अध्यक्ष ने कहा है कि इसके एयरलाइन व्यवसायों को एक में कंसोलिडेटेड किया जाना चाहिए। 

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