क्या है GDP

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। जीडीपी किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक जीडीपी का मतलब है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है। अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था ज्यादा रोजगार पैदा कर रही है। इसका यह भी मतलब है कि लोगों का जीवन स्तर भी आर्थिक तौर पर समृद्ध हो रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि कौन से क्षेत्र में विकास हो रहा है और कौन सा क्षेत्र आर्थिक तौर पर पिछड़ रहा है।  

जीवीए क्या है 

ग्रॉस वैल्यू ऐडेड यानी जीवीए। साधारण शब्दों में कहा जाए तो जीवीए से किसी अर्थव्यवस्था में होने वाले कुल आउटपुट और इनकम का पता चलता है। यह बताता है कि एक तय अवधि में इनपुट कॉस्ट और कच्चे माल का दाम निकालने के बाद कितने रुपए की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन हुआ। इससे यह भी पता चलता है कि किस खास क्षेत्र, उद्योग या सेक्टर में कितना उत्पादन हुआ है। 

नेशनल अकाउंटिंग के नजरिए से देखें तो मैक्रो लेवल पर जीडीपी में सब्सिडी और टैक्स निकालने के बाद जो आंकड़ा मिलता है, वह जीवीए होता है। अगर आप प्रोडक्शन के मोर्चे पर देखेंगे तो आप इसको नेशनल अकाउंट्स को बैलेंस करने वाला आइटम पाएंगे। 

जीडीपी और जीवीए में अंतर क्या है 

GVA से प्रोड्यूसर यानी सप्लाई साइड से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का पता चलता है। जबकि जीडीपी में डिमांड या कंज्यूमर साइड की तस्वीर दिखती है। जरूरी नहीं कि दोनों ही आंकड़े एक से हों क्योंकि इन दोनों में नेट टैक्स के ट्रीटमेंट का फर्क होता है। 

इन दोनों में कौन-सा पैमाना अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर बताता है 

जीवीए से हर सेक्टर के उत्पादन आकड़ों की अलग तस्वीर मिलती है। इससे नीति निर्माताओं को यह जानने में मदद मिलती है कि क्या किसी सेक्टर को इंसेंटिव की जरूरत है, लेकिन जीडीपी का आंकड़ा तब अहम साबित होता है जब अपने देश की तुलना दूसरे देश की अर्थव्यवस्था से करनी होती है। इसमें दोनों देशों की आय की तुलना की जाती है। 

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