कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग डिफॉल्ट घोषित, मेंबरशिप भी रद्द हुई

मुंबई- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग को अपनी मेंबरशिप से बाहर कर दिया है। इसके साथ ही NSE ने इस ब्रोकरेज हाउस को डिफॉल्टर करार दिया है। NSE ने अपने सर्कुलर में कहा है, “NSEIL के नियम 1 और नियम 2 के तहत कार्वी ब्रोकिंग को NSE के मेंबरशिप से बाहर कर दिया गया है। इसके साथ ही 23 नवंबर को मार्केट बंद होने के बाद से चैप्टर XII के प्रोविजन 1 (a) के तहत कार्वी को डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया है।” 

नवंबर 2019 में कार्वी ब्रोकरेज हाउस ने निवेशकों से बिना अथॉरिटी लिए 95,000 निवेशकों के 2300 करोड़ रुपए के सिक्योरिटीज अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया था। कार्वी ने पावर ऑफ अटर्नी का गलत इस्तेमाल करते हुए निवेशकों के शेयर अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर लिए थे। 

22 नवंबर 2019 में SEBI ने कार्वी के नए क्लाइंट जोड़ने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही स्टॉक ब्रोकिंग करने और पावर ऑफ अटर्नी के इस्तेमाल करने पर भी रोक लगा दी थी। कार्वी ने चालाकी दिखाते हुए अपने शेयरों के बजाय अपने निवेशकों के शेयर गिरवी रखकर फंड जुटाया था। इस तरह जुटाए गए कुछ फंड का हिस्सा कार्वी की दूसरी कंपनी कार्वी रियल्टी लिमिटेड को भी ट्रांसफर किया था। 2 दिसंबर 2019 से ही कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग को डिसेबल कर दिया गया था। 

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के कामकाज पर रोक लगने के बाद कई महीनों से निवेशकों का  पैसा फंसा हुआ है। ऐसे में अब उम्मीद है कि निवेशक NSE के इनवेस्टर प्रोटेक्शन फंड (IPF) में आवेदन करके 25 लाख रुपए तक का निवेश वापस ले सकते हैं। यह भी दिलचस्प है कि कार्वी को तब डिफॉल्टर घोषित किया गया जब SEBI ने NSE को IPF का फंड बढ़ाने की मंजूरी दी। SEBI ने NSE को IPF का फंड 594 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपए कर दिया। एक अनुमान के मुताबिक कार्वी ने 1000 करोड़ रुपए पर डिफॉल्ट किया है। 

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