ICICI Bank की पूर्व CEO चंदा कोचर को मिली क्लीन चिट, अब नहीं जब्त होगी प्रॉपर्टी

मुंबई– निजी क्षेत्र के बैंक, ICICI Bank की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चंदा कोचर को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के आदेश को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की अथॉरिटी ने खारिज कर दिया। इससे चंदा कोचर को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को लोन देने के मामले में क्लीन चिट मिल गई है। इसके साथ ही ED अब चंदा कोचर की प्रॉपर्टी जब्त नहीं करेगी।  

बता दें कि इस फैसले से इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी एक्ट (IBA) के सेक्शन 12A के तहत वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज डेट रिस्ट्रक्चरिंग के लिए अब आवेदन कर सकती है। वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत ने कहा कि उनका आवेदन फिलहाल कमिटी ऑफ क्रेटिडर्स के पास लंबित पड़ा है। जल्दी ही इस आवेदन पर क्रेडिटर्स वोटिंग करने वाले हैं। 

ED के क्लेम को खारिज करते हुए PMLA की अथॉरिटी ने  कहा कि वह इस बात से सहमत है कि चंदा कोचर ने वीडियोकॉन ग्रुप को 300 करोड़ रुपए का लोन ICICI Bank की क्रेडिट पॉलिसी  के अनुसार ही दिया है। अथॉरिटी ने कहा कि इस आदेश में कहा गया है कि वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स को दिया गया लोन कभी भी बुरे फंसे कर्ज (NPA) घोषित नहीं किया गया था। धूत ने कहा कि PMLA से जुड़ी अथॉरिटी ने चंदा कोचर की प्रॉपर्टी जब्त करने का आदेश खारिज कर दिया। साथ ही उन्हें क्लीन चिट दे दी। लंबे समय से चला आ रहा यह मामला खत्म हो गया है। भारतीय बैंक अब वीडियोकॉन के आवेदन पर वोटिंग कर सकते हैं। 

इस फैसले में कहा गया है कि चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी नूपावर रिन्युएबल्स में धूत के 64 करोड़ रुपए के निवेश का जिक्र CBI की तरफ से दायर फर्स्ट इनफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) में नहीं है। इससे पहले स्पेशल कोर्ट ने पिछले हफ्ते चंदा कोचर के पति और कारोबारी दीपक कोचर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। वह ICICI बैंक-वीडियोकॉन मनी लॉन्ड्रिंग केस के आरोपी हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सितंबर में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत दीपक को गिरफ्तार किया था। इस पर अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। 

बैंकिंग सेक्टर में पुरुषों को पीछे छोड़ा 

चंदा कोचर वो नाम है जिन्होंने न सिर्फ भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ा, बल्कि पूरी दुनिया में बैंकिंग के सेक्टर में अपनी एक अलग पहचान बनाई। राजस्थान के जोधपुर में एक सिंधी परिवार में पैदा हुईं कोचर बेहतर शैक्षणिक माहौल में पली-बढ़ीं। उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में बैचलर, इंस्टिट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेट्स ऑफ इंडिया से कॉस्ट अकाउंटेसी की और फिर मुंबई यूनिवर्सिटी से ही मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली। 

1984 में बैंक से जुड़ी थी चंदा  

1984 में बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई जॉइन किया। जब 1994 में आईसीआईसीआई संपूर्ण स्वामित्व वाली बैंकिंग कंपनी बन गई तो चंदा कोचर को असिस्टेंट जनरल मैनेजर बनाया गया। इसके बाद चंदा कोचर लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं। डिप्टी जनरल मैनेजर, जनरल मैनेजर के पदों से होती हुई 2001 में बैंक ने उन्हें एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बना दिया। फिर वो चीफ़ फ़ाइनेंशियल ऑफ़िसर बनाई गईं। 

धीरे-धीरे तरक्की कर वो आईसीआईसीआई बैंक (ICICI BANK) की सीईओ बनी। फोर्ब्स मैगजीन की दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में शुमार होने वाली चंदा कोचर ने लोन विवाद मामले में इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। बैंक की कर्जदार कंपनी विडियोकॉन इंडस्ट्रीज की तरफ से कोचर के पति की कंपनी में निवेश को लेकर गड़बड़ी के आरोपों के बाद चंदा कोचर ने अक्टूबर 2018 में इस्तीफा दे दिया। 

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