प्रभात डेयरी पर सेबी ने कसा शिकंजा, 7 दिनों के अंदर 1,292 करोड़ जमा करने का आदेश

मुंबई– पूंजी बाजार नियामक सेबी ने प्रभात डेयरी पर शिकंजा कस दिया है। इसने कंपनी को कहा है कि वह 1,292 करोड़ रुपए किसी नेशनल बैंक में एक अलग खाते में जमा कराए। यह पैसा 7 दिनों के अंदर जमा कराना होगा। साथ ही उसने फॉरेंसिक ऑडिट में मदद नहीं करने पर कंपनी को फटकार लगाई है।

सेबी ने जारी आदेश में कहा कि ऑडिट पूरा होने तक कंपनी अकाउंट से पैसे नहीं निकाल सकती है। इसके बाद बुधवार को स्टॉक मार्केट में प्रभात डेयरी के शेयर में 2.25% की तेजी के साथ 50 रुपए प्रति शेयर के भाव पर बंद हुए। आज प्रभात डेयरी के शेयर में 20% तक की उछाल देखने को मिली, लेकिन अंत में यह 2.25 फीसदी की तेजी के साथ बंद हुआ।

सेबी ने प्रभात डेयरी के वित्त वर्ष 2018-19 और 2019-20 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए जुलाई में ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया। इस फॉरेंसिक ऑडिटर को प्रभात डेयरी के अकाउंट में हेरा-फेरी, वित्तीय और बिजनेस ट्रांजैक्शन में जोड़-तोड़ और कंपनी के प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स और मैनेजमेंट में शामिल अधिकारियों द्वारा पैसों को गलत तरीके से ट्रांसफर करने के आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

सेबी ने कहा कि प्रभात डेयरी के प्रबंध निदेशकों के फॉरेंसिक ऑडिटर के साथ सहयोग नहीं करने की बात सामने आई है। वे ऑडिट शुरू करने के लिए जरूरी दस्तावेज और सूचनाएं बार-बार मांगने पर भी उपलब्ध वहीं करा रहे है। सेबी ने कहा, जब तक ऑडिट पूरा नहीं हो जाता वह यह तय नहीं कर सकती कि कंपनी ने किसी तरह की हेरा-फेरी की है या नहीं। इसलिए ऑडिट के काम में ऑडिटर का सहयोग करें।

जनवरी, 2019 में प्रभात डेयरी ने अपनी सहायक कंपनी सनफ्रेश एग्रो को तिरुमाला मिल्क प्रोडक्ट्स के हाथों 1227 करोड़ रुपए में बेच दिया था। इसके बाद स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि टैक्स देनदारियों और दूसरे ट्रांजैक्शन कॉस्ट काटने के बाद कंपनी इस बिक्री से प्राप्त बड़ी राशि अपने शेयरहोल्डर्स को देगी। ये ट्रांजैक्शन कंपनी द्वारा अप्रैल 2019 में पूरे कर लिए गए। इसके बाद सितंबर, 2019 में कंपनी ने कहा कि इसके कुछ प्रमोटर पब्लिक शेयरहोल्डर्स से शेयर खरीदकर फिर से कंपनी की 49.9% हिस्सेदारी पाना चाहते हैं और कंपनी को शेयर बाजारों से डिलिस्ट कराना चाहते हैं। इस ट्रांजैक्शन का कोई ट्रेस नहीं मिलने पर सेबी ने कंपनी का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया।

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