अगले 3 से 6 महीनों में IPO में आ सकती है तेजी, कई कंपनियां लिस्ट होने के लिए हैं तैयार

मुंबई- अगले 3 से 6 महीनों में कई सारी कंपनियां IPO लेकर आ सकती हैं। हाल में जिस तरह का माहौल बाजार का रहा है, ऐसे में यह कंपनियां पैसे जुटाने के लिए आ सकती हैं। इसमें हेल्थकेयर, कमर्शियल रियल इस्टेट (रिट) और कंज्यूमर सेक्टर से कंपनियां आ सकती हैं। पिछले 9 महीनों में IPO, FPO, QIP, राइट्स इश्यू आदि से 35 अरब डॉलर की रकम जुटाई गई है।  

विश्लेषकों के मुताबिक पूंजी बाजार नियामक सेबी ने दर्जनों कंपनियों को IPO की मंजूरी दे रखी है। कोवि़ड-19 की वजह से यह कंपनियां बाजार में आने से रुकी हुई थीं। लेकिन हाल में जिस तरह से 8-10 कंपनियों ने बाजार से पैसा जुटाया है, उससे इन कंपनियों की तैयारी शुरू हो गई है। जो कंपनियां हाल में IPO लेकर आई थीं, उनको बहुत ही अच्छा सब्सक्रिप्शन तो मिला ही, साथ में उनकी लिस्टिंग भी धमाकेदार हुई। हाल में जो IPO रहे हैं उसमें कमर्शियल रियल इस्टेट, टेक, स्पेशियालिटी केमिकल या फिर बाजार की लीडर कैम्स और यूटीआई के आईपीओ रहे हैं। निवेशकों ने यूटीआई को छोड़कर इन सभी आईपीओ में अच्छा पैसा लगाया है। इसका मतलब है कि निवेशक बहुत ही बारीकी से कंपनियों पर नजर रख रहे हैं।  

विश्लेषकों के मुताबिक हाल में सभी तरह से जुटाए गए फंड में तेजी दिखी है। इसमें विदेशी और घरेलू संस्थानों ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई है। बाजार का माहौल पूरी तरह से पिछले तीन महीनों से पॉजिटिव रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूरी दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने लिक्विडिटी और ब्याज की दरों पर फोकस किया। इससे अर्थव्यवस्था को रिकवरी करने में मदद मिली। निवेशकों ने उन कंपनियों में निवेश करना पसंद किया जो अपने सेक्टर्स में लीडर हैं।  

ग्लोबल, सॉवरेन और पेंशन फंड ने भारत में अच्छा खासा निवेश अच्छी क्वालिटी वाले पेपर्स में किया है। म्यूचुअल फंड ने ढेर सारी बड़ी डील की हैं। रिटेल की भागीदारी डायरेक्ट इक्विटी में मार्च के बाद से बढ़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि लॉकडाउन में लोगों के पास बचत हुई और उसे डायरेक्ट इक्विटी में निवेश किया गया। रिटेल निवेशकों ने घर से काम किया जिसके कारण इक्विटी से अच्छा रिटर्न मिला है। इक्विटी बाजार ने निवेशकों को इस दौरान आकर्षित किया है क्योंकि दूसरे असेट क्लास जैसे रियल इस्टेट और फिक्स्ड इनकम का रिटर्न कम रहा है। 

विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की बात करें तो इन्होंने मार्च और अप्रैल में 8.3 अरब डॉलर के शेयरों की बिक्री की थी। पर मई और सितंबर में इन्होंने 10.6 अरब डॉलर का निवेश किया। एफपीआई सेंटीमेंट इस समय पॉजिटिव है। भारत की मजबूत प्रोफाइल के चलते वैश्विक फंड्स खासकर एफपीआई ने लगातार निवेश करने पर फोकस किया है।  

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