मैं 18 साल का अनुराग तिवारी हूं यूपी वाला, रतन टाटा के क्लब में जुड़ेंगे, अमेरिका की कार्नेल युनिर्वसिटी में 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप के साथ पढ़ेंगे

मुंबई- 18 वर्ष के अनुराग तिवारी पूर्वी यूपी के सारासन गांव में रहते हैं। जल्द ही यह गांव चर्चित हो सकता है। कारण यह है कि अनुराग अब रतन टाटा के क्लब में जुड़ गए हैं। वे 100 प्रतिशत स्कॉलर शिप के साथ अमेरिका की प्रसिद्ध यूनिर्वसिटी कार्नेल में पढ़ने के लिए जा रहे हैं।  

यूपी के रिमोट गांव में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सदस्य अनुराग की यह उपलब्धि इस समय चर्चा में है। तिवारी रतन टाटा, शेफ विकास खन्ना और रोहन मूर्ति के क्लब में शामिल हुए हैं। यह सभी लोग अमेरिका के इसी कार्नेल विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। साल 2019 में कुल 49 हजार से ज्यादा अप्लीकेशन में से केवल 5,183 लोगों को इस विश्व विद्यालय में एडमिशन के लिए चुना गया था।

फिलहाल अनुराग तिवारी और उनके परिवार के लिए यह किसी सेलिब्रेशन से कम नहीं है। 13 जुलाई को जारी सीबीएसई के रिजल्ट में उन्होंने 98.2 प्रतिशत अंक हासिल किया है। तिवारी कहते हैं कि कार्नेल विश्वविद्यालय उनकी पहली पसंद रही है।

2013 में तिवारी के स्कूल टीचर ने उनको एहसास दिलाया कि वह जिस एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में हैं, वह ठीक ठाक नहीं है। इसके बाद तिवारी को एक ऐसे स्कूल के बारे में जानकारी दी गई, जहां वह भविष्य के लिए अपने हुनर को निखार सकें।

अनुराग ने कहा कि मेरे शिक्षक ने विद्याज्ञान के लिए फॉर्म भरा और मुझे बताया कि यह संस्था उत्तर प्रदेश में वंचित क्लास के लोगों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि और यह शायद सबसे अच्छा फैसला था। शिव नाडर फाउंडेशन की एक पहल से विद्याज्ञान की स्थापना 2009 में की गई थी ताकि क्वालिटी शिक्षा प्रदान करके आर्थिक रूप से वंचित ग्रामीण पृष्ठभूमि के तेज छात्रों की पहचान और पालन पोषण किया जा सके।

यह उन छात्रों के लिए उपलब्ध है जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 1 लाख रुपए प्रति वर्ष से कम है। इसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को शामिल किया गया है। विद्याज्ञान अपने बुलंदशहर और सीतापुर कैंपस में छठी कक्षा में हर साल 2.5 लाख आवेदकों से 200 छात्रों को शामिल करता है।

तिवारी उनमें से एक थे जब उन्होंने जुलाई 2013 में सीतापुर कैंपस ज्वाइन किया। उनका कहना है कि एक बार जब पढ़ाई शुरू हुई तब उन्हें एहसास हुआ कि वे अपने स्कूल में क्या-क्या मिस कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि यह अवसर मिला है क्योंकि जो शिक्षण और मार्गदर्शन की क्वालिटी इस स्कूल में है, वह मेरे पुराने स्कूल से अधिक अच्छा है।

तिवारी के घर की आय मुख्य रूप से कृषि से है। उनके पिता एक किसान हैं और उनकी मां गृहिणी हैं। अनुराग से बड़ी उनकी तीन बहनें हैं जिसमें से एक की शादी हो चुकी है। उनके रिजल्ट से पूरा गांव इस समय उत्साहित है। इस एरिया से वे पहले छात्र हैं जो बाहर जा रहे हैं।

अपनी भविष्य की योजना के बारे में वे कहते हैं कि वे कार्नल में इकोनॉमिक्स और गणित की पढ़ाई करेंगे जो अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम में होगा। इस यूनिर्वसिटी में केवल पढ़ाई पर ही फोकस नहीं होता है बल्कि छात्रों के सीखने के पैसन, अतिरिक्त गतिविधियों, कम्युनिटी इनवॉल्वमेंट और अन्य बातों पर फोकस किया जाता है। कार्नल विश्व विद्यालय अपने इकोनॉमिक्स प्रोग्राम के लिए जाना जाता है। यहां से निकले कई छात्र इकोनॉमिक्स में नोबल पुरस्कार विजेता रहे हैं। दिलचस्प यह है कि विश्व बैंक के पूर्व प्रमुख कौशिक बसु इसी यूनिर्वसिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं।

अनुराग कहते हैं कि वे अमेरिका में इसलिए जा रहे हैं कि इंटरनेशनल एक्सपोजर उन्हें मिल सके। वे इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री हासिल करना चाहते हैं और बाद में वे भारत आकर अर्थशास्त्री बनना चाहते हैं। वे गांव में स्कूल भी खोलना चाहते हैं। वे जमीनी स्तर पर समस्याओं को हल कर अपने ज्ञान से समाज को कुछ देने का विचार रखते हैं। कोरोना से लॉकडाउन की वजह से वे सितंबर से ऑन लाइन क्लासेस शुरू करेंगे। पर उनको उम्मीद है कि वे सितंबर तक पहुंच जाएंगे और फरवरी के लिए तैयारी करेंगे। एचसीएल के एमडी शिव नाडर उनकी फ्लाइट टिकट स्पांसर करेगा।

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