सेबी ने स्टॉक एडवाइजर्स वाइल्ड स्टॉक और प्रमोटर पर प्रतिबंध लगाया, निवेशकों से पैसे ठगने का आरोप

मुंबई- पूंजी बाजार नियामक सेबी ने भोपाल के हबीबगंज इलाके से शेयरों सहित अन्य निवेश की सलाह देनेवाले वाइल्ड स्टॉक और इसके प्रमोटर संजीव सिंह पर कारोबार करने और सलाह देने आदि पर प्रतिबंध लगा दिया है। सेबी ने शुक्रवार को 19 पेज के जारी एक आदेश में यह जानकारी दी। सेबी के मुताबिक इस कंपनी ने अब तक 49.47 लाख रुपए निवेशकों से लिया है। यह एक्स पार्टी ऑर्डर है। सेबी ने कहा है कि नोटिस के बाद प्रमोटर को 15 दिनों के अंदर इस मामले में जवाब देना है।

सेबी ने आदेश में कहा है कि वाइल्ड स्टॉक और इसके प्रमोटर संजीव सिंह पर पब्लिक से किसी भी तरह के पैसे लेने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। साथ ही स्टॉक मार्केट में कोई गतिविधियां नहीं कर सकते हैं। इसी तरह अपने पैसे को कहीं ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं। सेबी ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी खातों से पैसे निकासी पर रोक लगाएं।

सेबी ने आदेश में कहा कि उसे ढेर सारे निवेशकों से इस मामले में शिकायत मिली थी कि वाइल्ट स्टॉक काफी सेवाएं दे रहा है। वह अच्छा रिटर्न देने का वादा कर लोगों से पैसा लेता है। सेबी ने जब इसकी जांच की तो वाइल्ट स्टॉक की वेबसाइट हालांकि बंद आई। पर यह जरूर पाया गया कि इसके प्रमोटर संजीव सिंह इस तरह के वादे करते थे और वेबसाइट पर 4 बैंक खाते भी डाल रखे थे। सेबी ने पाया कि इसमें से दो बैंक खाते कंपनी के नाम पर और दो बैंक खाते संजीव के नाम पर हैं। यह खाते एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई बैंक और बैंक ऑफ इंडिया में हैं। सेबी के मुताबिक यह वाइल्ड स्टॉक सेबी के पास रजिस्टर्ड नहीं है। साथ ही संजीव सिंह पेटीएम, भीम, गूगल पे आदि से भी पैसा लेते थे।

सेबी के मुताबिक, संजीव सिंह ने वेबसाइट पर यह दावा किया कि उनके पास अच्छे स्किल्ड स्टॉफ हैं। जीरो कॉस्ट पर सेवा देते हैं। रिटेल कम्युनिटी को तैयार करते हैं। जानकारी शेयर करते हैं। एक्सपर्ट एडवाइज देते हैं। साथ ही गारंटी के साथ लाभ वाले निवेश की सलाह देते हैं। सेबी ने जांच की तो पता चला कि यह फर्म इक्विटी सेगमेंट, एफएंडओ और कमोडिटी में सेवा देता है। सेबी के मुताबिक, कंपनी इक्विटी में मासिक 20 हजार रुपए में सेवा देती थी। तिमाही पैकेज 50 हजार रुपए का था। फ्यूचर सेगमेंट में मासिक 75 हजार रुपए और तिमाही में 2.10 लाख रुपए का पैकेज था। कमोडिटी में मासिक 30 हजार, तिमाही में 80 हजार रुपए का पैकेज कंपनी देती थी।

जांच में पता चला कि कंपनी का एक खाता छात्र के रूप में, एक खाता सैलरी के रूप में, दो खाता स्टॉक ब्रोकिंग के रूप में था। कंपनी की वेबसाइट हालांकि पिछले साल अप्रैल में ही होस्ट हुई थी। बैंक खातों में एक खाते में 10.69 लाख, एक खाते में 6.81 लाख, एक खाते में 22.36 लाख और एक खाते में 9.59 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन पिछले साल अप्रैल के बाद से लेकर इस साल के फरवरी तक हुआ है।

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