44.6% भारतीय छात्रों को ‘स्कूल फ्रॉम होम’ विकल्प लग रहा अच्छा: ब्रेनली

मुंबई- मौजूदा स्कूल फ्रॉम होम की परिस्थिति पर जानकारी हासिल करने हेतु छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए विश्व के सबसे बड़े ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म ब्रेनली ने  2,150 भारतीय छात्रों के बीच एक सर्वेक्षण किया जिसमें इसमें कुछ रोचक नतीजे सामने आए हैं।

शुरुआत करने वाले करीब 68.7 ब्रेनली यूजर ने माना कि इस महामारी से पहले, वे कभी ऑनलाइन क्लास का हिस्सा नहीं बने थे। आज, लर्निंग के इस तरीके ने करीब 72.8 फीसदी छात्रों के रोजमर्रा की दिनचर्या को भी प्रभावित किया है। 44.6 फीसदी छात्रों का कहना है कि वे महामारी के बाद भी स्कूल फ्रॉम होम के विचार को प्राथमिकता देगें। इसलिए इस महामारी के बाद भारत में ऑनलाइन क्लास लेने वाले छात्रों की संख्या में इजाफा हो सकता है।

64.5 फीसदी छात्रों ने यह भी माना है कि वे शिक्षा में इस ‘न्यू नॉमर्ल’ के अभ्यस्त हो चुके हैं। हालांकि, भारत में तेजी से बढ़ रहे इस ऑनलाइन लर्निंग कल्चर में नेटवर्क कनेक्टिविटी एक बड़ी बाधा बन सकती है। तकरीबन 59.8 फीसदी छात्रों ने कहा कि नेटवर्क कनेक्टिविटी स्कूल फ्रॉम होम मॉडल की सबसे बड़ी अड़चन है। यह पूछने पर कि क्या उन्होंने भी इस तरह की समस्या का सामना किया है तो 55.9 ब्रेनली यूजर का कहना था कि नहीं उन्हें ऐसी कोई समस्या नहीं हुई।

ब्रेनली ने छात्रों से बातचीत के प्राथमिक माध्यम के बारे में भी पूछा। इसमें लिस्टेड सभी चारों विकल्पों- फोन कॉल, सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप और ब्रेनली जैसे ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म को 25-25% रिस्पॉन्स मिला। ब्रेनली ने छात्रों से पूछा कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान किस प्रकार अपनी दुविधाओं को हल किया। 37.7 फीसदी छात्रों ने टीचर से फोन कॉल या सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क कर, जबकि 30.2 फीसदी छात्रों ने ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी दुविधाओं को दूर किया। छात्र आमतौर पर अपनी समस्याओं को हल करे के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लेते हैं।

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